उत्तराखण्ड Archives - Suprabhat Uttarakhand https://suprabhatuttarakhand.com/category/uttarakhand/ Suprabhat Uttarakhand News Thu, 05 Mar 2026 06:07:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा https://suprabhatuttarakhand.com/2024-25-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%89%e0%a4%a4/ Thu, 05 Mar 2026 06:07:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/2024-25-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%89%e0%a4%a4/ राज्य में वर्ष एमएसएमई की कुल संख्या बढ़कर हुई 79394 वर्ष 2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य, जो वर्ष…

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राज्य में वर्ष एमएसएमई की कुल संख्या बढ़कर हुई 79394

वर्ष 2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 1750 हो गई है

2026-27 के लिए राज्य की जीएसडीपी 8.2 प्रतिशत रहने का है अनुमान

देहरादून। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने गुरुवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ रहा, जो वर्ष 2021-22 में 2.54 लाख करोड़ रुपए थी। 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में डेढ़ गुना से ज्यादा का उछाल आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 194670 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 2,73,921 हो गई। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस वर्ष यह सर्वेक्षण नेशनल कांउसिल ऑफ एप्लाइड इकोनाॅमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के साथ मिलकर तैयार किया गया है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि वर्ष 2024-25 में ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रहा है। मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स वर्ष 2021-22 में 9.7 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट वर्ष 2021-22 में 60.1 प्रतिशत था, वर्ष 2024-25 में 64.4 प्रतिशत है तथा यह रोजगार के क्षेत्र में 4.3 प्रतिशत की बढोत्तरी को दर्शाता है। उन्होंने बताया ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स वर्ष 2001 में 0.247, वर्ष 2017 में 0.684, वर्ष 2021-22 में 0.718 जो अब बढ़कर वर्ष 2024-25 में 0.722 हो गया है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की कुल संख्या 59798 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 79394 हो गई है। उन्होंने एमएसएमई के अंतर्गत रोजगार पाने वालों की संख्या वर्ष 2022 में 343922 थी जो वर्ष 2025 में बढ़कर 456605 हो गई है। राज्य में वर्ष 2021-22 तक लार्ज इंडस्ट्री की संख्या 107 थी जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 128 हो गई हैं। इसके साथ राज्य में वर्ष 2017 तक स्टार्टअप की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2021-22 में 702 थी तथा वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1750 हो गई है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में सड़कों की कुल लम्बाई वर्ष 2021-22 में 50393 किमी थी, जो 2024-25 में बढ़कर 51278 किमी हो गई है। राज्य में 2022 तक 2 हेलीपोर्ट थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 7 हो गए। हेलीपेड की संख्या वर्ष 2021-22 में 60 थी जो वर्ष 2024-25 में 118 हो गई है। उन्होंने बताया कि प्राइमरी विद्यालयों में ड्राॅपआउट का अनुपात वर्ष 2021-22 में 1.64 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में 1.41 प्रतिशत हो गया है, जबकि सेकेंडरी विद्यालयों में यह अनुपात वर्ष 2021-22 में 7.65 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में 4.59 प्रतिशत हो गया है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि राज्य में शासकीय एवं अशासकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या वर्ष 2021-22 में 124 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 139 हो गई है। इसके साथ इजीनियरिंग कॉलेज गवर्नमेंट एवं प्राइवेट की संख्या वर्ष 2021-22 में 20 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 52 हो गई है। उन्होंने बताया राज्य में 2021-22 में कुल 5157 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन होता था, जो 2024-25 में यह उत्पादन बढ़कर 16500 मिलियन यूनिट हो गया है। जबकि कंजम्पशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी (विद्युत खपत) में बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2022 में बिजली की खपत 12518 मिलियन यूनिट थी, जो 2024-25 में बढ़कर 17192 मिलियन यूनिट हो गई है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि सोलर इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन के क्षेत्र में राज्य में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। वर्ष 2021-22 में सौर ऊर्जा के माध्यम से 439 मेगावाट उत्पादन होता था, जो 2025 में बढ़कर 1027 मेगावाट हो गया है। उन्होंने बताया राज्य में शिशु मृत्यु दर (प्दंिदज डवतजंसपजल त्ंजम) वर्ष 2021-22 में 22 था, जो 2024-25 में घटकर 20 पर आ गया है। इसके साथ मातृ मृत्यु दर वर्ष 2021-22 में 103 थी, जो 2024-25 में घटकर 91 पर आ गया है। इसके साथ ही राज्य में लाइफ एक्सपेर्टेंसी की उम्र 71.7 साल से बढ़कर 73 साल हो गई है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 में 97 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा थी जो अब शतप्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में धान और गेहूं उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। राइस एवं व्हीट प्रोडक्शन वर्ष 2021-22 में 28.23 कुंतल प्रति हेक्टेयर था जो अब बढ़कर 32.47 कुंतल प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है। उन्होंने बताया वर्ष 2021-22 में औषधिया एंड एरोमैटिक प्लांट का एरिया कुल 900 हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 तक 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। वहीं फिश उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। फिश उत्पादन वर्ष 2021-22 में कुल 7325 टन प्रति साल होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 10487 टन प्रति साल हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में वर्ष 2021-22 में 8225 होटलध्अदर स्टे थे जो 2024-25 में बढ़कर 10509 हो गए है। वहीं राज्य में 2021- 22 में 3935 होमस्टे थे, जिनकी संख्या 2024-25 में बढ़कर 6161 पहुंच गई है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि एसडीजी इंडेक्स में वर्ष 2021-22 में राज्य ने चैथा स्थान प्राप्त किया था, वहीं वर्ष 2023-24 में उत्तराखण्ड एसडीजी इंडेक्स की रेंक में प्रथम स्थान पर रहा। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की जीएसडीपी 8.2 प्रतिशत अनुमानित है।

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व्यय-वित्त समिति की बैठक में अमृत 2.0 के तहत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को मंजूरी https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%a0%e0%a4%95-%e0%a4%ae/ Thu, 05 Mar 2026 05:29:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%a0%e0%a4%95-%e0%a4%ae/ देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति की बैठक का आयोजन कर विभिन्न मुददों पर चर्चा…

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देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति की बैठक का आयोजन कर विभिन्न मुददों पर चर्चा की।
गुरूवार को यहां मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों से संबंधित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर विचार करते हुए उन्हें अनुमोदन प्रदान किया गया। अमृत 2.0 के ट्रांच-2 के अंतर्गत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना का क्रियान्वयन उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा किया जाएगा। जनपद पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल-एकेश्वर विकास खंड के अंतर्गत सतपुली बैराज के निर्माण (पुनरीक्षित) प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित फायर स्टेशन में टाइप-द्वितीय, टाइप-तृतीय तथा टाइप-चतुर्थ श्रेणी के कुल आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई। जनपद देहरादून के डांडा लखौंड क्षेत्र में सहस्त्रधारा रोड पर शहरी विकास निदेशालय के कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। नगर निगम रुद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण के कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन व्यवहारिक, मितव्ययी, पारदर्शी तथा गुणवत्ताकृपरक तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं के कार्य निर्धारित समयसीमा में तेजी से पूर्ण किए जाएं। उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखने तथा योजनाओं को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ (सस्टेनेबल) बनाने के उद्देश्य से कार्य करने के निर्देश भी दिए। बैठक में सचिव नितेश झा, शैलेश बगौली, एस.ए. अदांकी, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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नदी में तैरता मिला हाथी के बच्चे का शव https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/ Thu, 05 Mar 2026 05:03:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/ नैनीताल। वन प्रभाग रामनगर के अंतर्गत आने वाले अपर कोसी बीट रिंगोड़ा क्षेत्र में कोसी नदी में एक महीने के…

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नैनीताल। वन प्रभाग रामनगर के अंतर्गत आने वाले अपर कोसी बीट रिंगोड़ा क्षेत्र में कोसी नदी में एक महीने के हाथी के बच्चे का शव तैरता हुआ मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए रामनगर लाया गया। प्रारंभिक जांच में हाथी के बच्चे के शरीर पर टाइगर के पंजों के निशान पाए गए हैं, जिससे वन विभाग टाइगर के हमले की आशंका जता रहा है।
रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत पड़ने वाले अपर कोसी बीट रिंगोड़ा क्षेत्र में कोसी नदी में एक महीने के हाथी के बच्चे का शव मिला। स्थानीय लोगों द्वारा नदी में शव तैरते हुए देखे जाने के बाद इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही रामनगर रेंज के रेंज अधिकारी शेखर तिवारी वनकर्मियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे, टीम ने नदी से हाथी के बच्चे के शव को बाहर निकाला और उसे जांच के लिए रामनगर लाया गया। रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि रिंगोड़ा क्षेत्र के अपर कोसी बीट में कोसी नदी में एक हाथी के बच्चे का शव तैर रहा है। उन्होंने बताया कि मृत हाथी के बच्चे की उम्र लगभग एक महीने के आसपास आंकी जा रही है। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर टाइगर के पंजों के स्पष्ट घाव दिखाई दे रहे हैं, इससे संभावना जताई जा रही है कि टाइगर के हमले में हाथी के इस शिशु की मौत हुई होगी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जंगल में कई बार टाइगर और हाथियों के बीच आमना-सामना हो जाता है। हालांकि हाथियों का झुंड आमतौर पर अपने बच्चों की सुरक्षा करता है, लेकिन किसी कारणवश यह बच्चा झुंड से अलग हो गया होगा और टाइगर का शिकार बन गया।
फिलहाल हाथी के बच्चे के शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो पाएगी।

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थराली के जंगलों में लगी भीषण आग, आग बुझाने में वन विभाग के छूट रहे पसीने https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80/ Thu, 05 Mar 2026 05:00:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80/ चमोली। गर्मी का सीजन शुरू होते ही जंगलों में आग लगनी शुरू हो चुकी है। ताजा मामला चमोली जिले के…

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चमोली। गर्मी का सीजन शुरू होते ही जंगलों में आग लगनी शुरू हो चुकी है। ताजा मामला चमोली जिले के थराली के जंगलों में सामने आया है। यहंा भीषण आग लगने से 20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर राख हो गए हैं। चेपड़ों गांव की गौशालाएं भी आग की जद में आ गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।
बता दें कि उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज के जंगलों में भीषण आग लगी है। चेपड़ों और सौगांव गांवों के जंगल इस आग की चपेट में आ गए हैं, जिसने तेजी से फैलते हुए खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा के वन क्षेत्रों को भी अपनी जद में ले लिया है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी लपटें 50 मीटर तक ऊंची उठ रही हैं और 20 फीट तक की ऊंचाई तक पहुंच रही हैं। आग ने अब तक लगभग 20 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को जलाकर राख कर दिया है। चेपड़ों गांव की गौशालाएं भी आग की जद में आ गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। आग की लपटें ऊपर की ओर जूनिधार गांव तक पहुंच गई हैं, जिससे ग्रामीण आबादी के लिए भी खतरा बढ़ गया है। खड़ी चटृानों और घने चीड़ के लीसे वाले जंगलों के कारण आग पर काबू पाना अत्यंत कठिन साबित हो रहा है।
अग्नि शमन कर्मचारियों और वन विभाग की टीमें आग बुझाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं, लेकिन खड़ी चटृानों और आग की प्रचंडता के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात का अंधेरा और लगातार गिरते पत्थर तथा जलते हुए पेड़ों के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी ने बताया कि टीम पूरी रात आग से लड़ने का प्रयास करती रही, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है।
आग की लपटों से जलते हुए पेड़ और पत्थर स्टेट हाईवे थरालीकृदेवाल मोटर मार्ग पर भी गिर रहे हैं, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों और राहगीरों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसके अतिरिक्त, आग ने जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है। कई छोटे-बड़े पेड़-पौधे जल गए हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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आपदाग्रस्त क्षेत्रों की अनदेखी पर जनप्रतिनिधियों का आमरण अनशन शुरू https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80/ Tue, 03 Mar 2026 05:47:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80/ रुद्रप्रयाग। एक ओर पूरा जिला होली के रंग में सराबोर है। वहीं दूसरी ओर बसुकेदार तहसील के आपदा प्रभावित गांवों…

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रुद्रप्रयाग। एक ओर पूरा जिला होली के रंग में सराबोर है। वहीं दूसरी ओर बसुकेदार तहसील के आपदा प्रभावित गांवों में पीड़ा और आक्रोश का रंग गहराता जा रहा है। अगस्त 2025 में आई भीषण दैवीय आपदा बादल फटना, भूस्खलन और जलप्रलय से तबाह हुए क्षेत्रों में अब तक राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू न होने के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दो मार्च से आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
तालजामण, जोला, डुंगर, भटवाड़ी, बड़ेथ और पातियूं गांवों में आपदा के घाव आज भी ताजा हैं। टूटी सड़कें, क्षतिग्रस्त पुल, उजड़ा बाजार और ठप संचार सेवाएं ग्रामीणों के जीवन को लगातार प्रभावित कर रही हैं। कई महीने बीत जाने के बावजूद पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी गति, या यूं कहें कि ठप स्थिति ने ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। आमरण अनशन पर बैठे जनप्रतिनिधियों में पूर्व प्रधान तालजामण शिवानंद नौटियाल, ग्राम प्रधान तालजामण दीनानाथ, ग्राम प्रधान जोला दीपा देवी तथा ग्राम उछोला के प्रतिनिधि रामचंद्र शामिल हैं। ये सभी बसुकेदार तहसील के विभिन्न प्रभावित गांवों की आवाज बनकर धरने पर बैठे हैं। अनशनकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। ज्ञापन सौंपे, बैठकें कीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। मजबूर होकर उन्हें आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा। रुद्रप्रयाग में आंदोलनकारियों ने प्रशासन के समक्ष 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं। जिनमें प्रमुख रूप से क्षतिग्रस्त सड़कों का शीघ्र निर्माण, चंदन गंगा नदी पर स्थायी पुल का निर्माण, छेनागाड़ बाजार का पुनर्निर्माण, मोबाइल और संचार नेटवर्क की बहाली, बैंकिंग सुविधाओं की पुनर्स्थापना आपदा प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास की मांग है. ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के बाद से वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्कूली बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में जोखिम उठाना पड़ रहा है और व्यापार पूरी तरह प्रभावित है। रुद्रप्रयाग में आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप कर राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की मांग की है। वहीं मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि ग्रामीणों की मांगों पर कार्यवाही जारी है। ग्रामीणों को समझाया जाएगा और अनशन तोड़ने को लेकर अधिकारियों को भेजा जाएगा।

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जिलाधिकारी के प्रयासों से मुख्यधारा से जुड़ने लगा सड़कों पर बिखरा बचपन https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8/ Tue, 03 Mar 2026 05:46:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8/ देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील एवं दूरदर्शी प्रयासों से सड़क पर भटकता और भिक्षावृत्ति व बालश्रम में संलिप्त बचपन…

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देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील एवं दूरदर्शी प्रयासों से सड़क पर भटकता और भिक्षावृत्ति व बालश्रम में संलिप्त बचपन अब शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने लगा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर ऐसे बच्चों के जीवन में नई आशा की किरण बनकर उभरा है। कभी मुरझाए हुए चेहरों पर अब त्योहारों की खुशियां दिखाई दे रही हैं। उनकी आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने संजोए जा रहे हैं। आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में न केवल उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है, बल्कि उनके भविष्य की स्पष्ट दिशा भी तय की जा रही है।
जिला प्रशासन की इस अभिनव पहल के तहत अब तक 174 से अधिक बच्चों को भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। रेस्क्यू अभियान के माध्यम से चिन्हित बच्चों को आधुनिक केयर सेंटर में लाकर काउंसलिंग, ब्रिज कोर्स, नियमित शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण एवं मानसिक संबल प्रदान किया जा रहा है।
हारिश, कक्षा 6, साधुराम इंटर कॉलेज का छात्र है। वह शारीरिक रूप से अत्यंत सक्रिय है और सभी प्रकार की खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता है।
वह मई माह 2025 में आईसीसी  से जुड़ा था। उससे पहले वह किसी भी विद्यालय में नामांकित नहीं था और उसे औपचारिक स्कूली शिक्षा का पूर्व अनुभव भी नहीं था। आईसीसी से जुड़ने के बाद अगस्त 2025 माह में उसे कक्षा 6 में साधुराम इंटर कॉलेज में मुख्यधारा (डंपदेजतमंउ) में प्रवेश दिलाया गया।
विद्यालय में प्रवेश के पश्चात उसने नियमित उपस्थिति दर्ज कराई है तथा प्रत्येक खेल गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी सक्रियता और प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया है।
जिलाधिकारी के निर्देशन में संबंधित विभागों की समन्वित कार्यवाही से इन बच्चों को औपचारिक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही सेंटर में संगीत, योग, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हाल ही में सेंटर के बच्चों ने उत्साहपूर्वक होली का पर्व मनाया। रंगों के साथ खिलखिलाती हंसी यह संदेश दे रही थी कि अब यह बचपन उपेक्षा का नहीं, बल्कि अवसरों का प्रतीक है। तीज-त्योहारों में सहभागिता से बच्चों में आत्मविश्वास एवं सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित हो रही है।
जिला प्रशासन द्वारा निरंतर रेस्क्यू अभियान चलाकर बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों की पहचान की जा रही है। ऐसे बच्चे जो पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण इन गतिविधियों में संलिप्त थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान कर शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहां कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित जीवन का अधिकार है। प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को रेस्क्यू करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाना है।
आज जो बच्चे कभी सड़कों पर थे, वही अब विद्यालयों में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं, खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। उनकी बदलती जिंदगी अन्य जरूरतमंद बच्चों और समाज के लिए प्रेरणा बन रही है।
जिला प्रशासन की यह पहल समाज के सहयोग से और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित न रहे।

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उत्तराखंड के दो गांवों में नहीं मनाते हैं ग्रामीण होली https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87/ Tue, 03 Mar 2026 05:44:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87/ 150 साल पुरानी मान्यताःरुद्रप्रयाग जिले के खुरजान व क्वीली के ग्रामीण निभा रहे हैं परंपरा देहरादून। देशभर में फागुन के…

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150 साल पुरानी मान्यताःरुद्रप्रयाग जिले के खुरजान व क्वीली के ग्रामीण निभा रहे हैं परंपरा

देहरादून। देशभर में फागुन के महीने में लोग रंगों और गुलाल में सराबोर नजर आते हैं और होली का त्योहार देभर में रंग, गुलाल और खुशियों के साथ मनाया जाता है। लेकिन उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में दो गांव ऐसे भी हैं, जहां डेढ़ सदी से होली के त्योहार पर सन्नाटा पसरा रहता है। इन गांवों में लोग होली पर सिर्फ पकवान बनाकर होली का आनंद लेते है। इन गांवों के ग्रामीण परंपरा का निर्वहन करते हुए 150 से अधिक साल से होली खेलने से परहेज करते है।
ग्रामीण बताते हैं कि इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता और पुरानी लोककथा है। ग्रामीणों के अनुसार उनकी इष्टदेवी मां त्रिपुरा सुंदरी को शोर-शराबा, हुड़दंग और चमकीले रंग पसंद नहीं हैं। गांव के लोगों का विश्वास है कि यदि वहे होली खेलेंगे तो देवी की शांति भंग होगी और इसका दुष्परिणाम पूरे गांव को भुगतना पड़ सकता है। इसी कारण यहां के लोग सादगी और शांति के साथ सामान्य दिन की तरह समय बिताते हैं। वह देवी की पूजा-अर्चना तो करते हैं, लेकिन रंगों का प्रयोग नहीं करते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि देवी की कृपा से ही उनका गांव सुरक्षित और खुशहाल है। यह परंपरा बताती है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों को लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं, जहां एक ओर देशभर में होली रंगों और उत्साह का प्रतीग्रामीणों के अनुसार, लगभग 150 से 300 साल पहले गांव के लोगों ने होली खेलने की कोशिश की थी। इसके कुछ ही समय बाद गांव में हैजा जैसी भयंकर महामारी फैल गई और कई लोगों की जान चली गई। ग्रामीणों ने इस घटना को दैवीय प्रकोप माना और यह मान लिया कि देवी होली के शोर-शराबे से नाराज हो गई थी। तभी से गांव में होली खेलने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई और तब से आज तक यह परंपरा चली आ रही है।क है, वहीं उत्तराखंड के दो गांवों में यह दिन आस्था, श्र(ा और अनुशासन का प्रतीक बन गया है।

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गृहमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने पहंुचे सीएम का स्वागत करने से रोकने पर भड़के भाजपा नेता https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%97%e0%a5%83%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95/ Tue, 03 Mar 2026 05:40:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%97%e0%a5%83%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95/ हरिद्वार। सुरक्षा घेरे में जाने से रोके जाने पर गुरुकुल हेलीपैड पर मुख्यमंत्री धामी के पहुंचने से पहले दर्जाधारी मंत्रियों…

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हरिद्वार। सुरक्षा घेरे में जाने से रोके जाने पर गुरुकुल हेलीपैड पर मुख्यमंत्री धामी के पहुंचने से पहले दर्जाधारी मंत्रियों और भाजपा पदाधिकारियों के बीच पुलिस का विवाद हो गया।  विवाद बढ़ता देख कुछ अधिकारियों ने बीच बचाव कराकर मामला शांत कराया, लेकिन दर्जाधारी और भाजपा पदाधिकारियों ने हेलीपैड पर ही मुख्यमंत्री से शिकायत कर दी।
मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हरिद्वार दौरा था। गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री बैरागी कैंप पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर आने का अलर्ट जारी हुआ तो, कई सुरक्षाकर्मियों ने रस्सी से सुरक्षा घेरा बनाया। इसी बीच दर्जाधारी ओमप्रकाश जमदग्नि, दर्जाधारी सुनील सैनी, भाजपा के जिला महामंत्री संजीव चैधरी, जिला महामंत्री हीरा सिंह बिष्ट, जिला उपाध्यक्ष आशु चैधरी समेत कई कार्यकर्ता अंदर जाने लगे। लेकिन प्रोटोकॉल का हवाला देकर सुरक्षा कर्मियों ने ओम प्रकाश जमदग्नि और सुनील सैनी को अंदर जाने से रोक दिया।
सुरक्षा घेरे में जाने से रोकने पर ओम प्रकाश जमदग्नि ने हंगामा खड़ा कर दिया। वो नाराज होकर गुरुकुल मैदान में खड़े हो गए। ओम प्रकाश जमदग्नि को भड़कता देख उनके साथ अन्य नेता भी वहां खड़े हो गए। ओम प्रकाश जमदग्नि ने एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप भी लगाया। हंगामा होते देख हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष सिंह उनके पास पहुंचे और उन्हें मनाने लगे।
हंगामे के बीच सीएम धामी का हेलीकॉप्टर लैंड हो गया लेकिन ओम प्रकाश जमदग्नि ने एसपी सिटी को माफी मांगने तक की बात कह डाली। इस बीच अन्य अधिकारियों ने आकर नाराज नेताओं को मनाया और मुख्यमंत्री के पास स्वागत के लिए ले गए। इतना ही नहीं, जैसे ही नाराज नेता मुख्यमंत्री के पास पहुंचे तभी उन्होंने मुख्यमंत्री से अधिकारियों की शिकायत कर दी और बताया कि हेलीपैड पर जब भी मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए नेता आते हैं, हर बार अधिकारियों द्वारा उनसे मिलने के लिए रोका जाता है।

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निजी फाउंडेशन ने किन्नर समाज के साथ किया होली मिलन कार्यक्रम https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/ Tue, 03 Mar 2026 05:38:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/ हरिद्वार। होली के हुड़दंग से दूर दूसरी ओर निजी फाउंडेशन ने होली को सामाजिक समरसता, स्वच्छता और नशा मुक्ति के…

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हरिद्वार। होली के हुड़दंग से दूर दूसरी ओर निजी फाउंडेशन ने होली को सामाजिक समरसता, स्वच्छता और नशा मुक्ति के संदेश के साथ मनाकर एक मिसाल पेश की। फाउंडेशन की ओर से किन्नर समाज के साथ होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया।
हरिद्वार नगर निगम की स्वच्छता की ब्रांड एंबेसडर सोनिया बुआ को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। शहर के निजी होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में फूलों और सूक्ष्म गुलाल से होली खेली गई। ताकि त्योहार का आनंद पर्यावरण के अनुकूल तरीके से लिया जा सके।
कार्यक्रम में फाउंडेशन की महिलाओं ने किन्नर समाज के सदस्यों को सम्मानित किया। इस दौरान सभी ने एक दूसरे के अनुभव साझा किए और समाज में समानता, स्वीकार्यता और आपसी प्रेम को मजबूत करने की बात कही। होली मिलन कार्यक्रम के बाद किन्नर समाज और फाउंडेशन से जुड़ी महिलाएं रानीपुर मोड़ और आसपास के बाजारों में पहुंचीं। वहां उन्होंने दुकानदारों और राहगीरों को जूट के बैग वितरित किए और पॉलिथीन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। लोगों ने भी पॉलिथीन का कम इस्तेमाल करने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति पर भी विशेष जोर दिया गया। फाउंडेशन की अध्यक्ष विनीता गोनियाल ने कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि वे नगर निगम की ओर से ब्रांड एंबेसडर बनाई गई सोनिया बुआ के साथ इस आयोजन को कर पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाना हैण् होली जैसे त्योहार हमें समाज को एकजुट करने का अवसर देते हैं। ब्रांड एम्बेसडर सोनिया बुआ ने कहा कि नई उड़ान भारत फाउंडेशन की महिलाओं की ऊर्जा और समर्पण को देखकर उनके भीतर भी नई सकारात्मक शक्ति का संचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब समाज के अलग अलग वर्ग एक साथ मिलकर शहर के लिए काम करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है। हम सभी मिलकर हरिद्वार को स्वच्छ, नशामुक्त और समावेशी शहर बनाने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में ट्रांसजेंडर समाज की ओर से सोनिया बुआ और रामा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। वहीं नई उड़ान भारत फाउंडेशन की ओर से अध्यक्ष विनीता गोनियाल, विभा गर्ग , गार्गी, अनिता शर्मा गुनमय, कुणाल सहित कई सदस्य शामिल हुए।

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होल्यारों की टीम कर रही पुराने मंदिरों को बचाने की पहल https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81/ Mon, 02 Mar 2026 05:05:00 +0000 https://suprabhatuttarakhand.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81/ पौड़ी। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनों से जुड़ने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का माध्यम भी…

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पौड़ी। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनों से जुड़ने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का माध्यम भी रहा है। एक दौर था, जब गांवों की होली, शहरों में बसे लोगों को पहाड़ वापस बुला लाती थी। लेकिन अब पलायन की मार ऐसी पड़ी है कि गांवों के घर ही नहीं, मंदिर भी सूने पड़ गए हैं। ऐसे में नैनीडांडा के होल्यार अब होली के जरिए अपने देवस्थलों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं।
पौड़ी गढ़वाल जिले के नैनीडांडा के होल्यार इन दिनों उन इलाकों में होली गा रहे हैं, जहां पहाड़ से पलायन कर लोग बस गए हैं। होली के पारंपरिक गीतों के माध्यम से ये होल्यार अपने रक्षक देवी मां बुंगीदेवी मंदिर के करीब 400 साल पुराने मंदिर को बचाने की गुहार प्रवासी पहाड़ियों से लगा रहे हैं। रामनगर और आसपास के तमाम इलाकों में ये टीम ठेठ पहाड़ी अंदाज में घर-घर पहुंच रही है। होल्यार जहां अपनों को उनके बंद पड़े घरों की याद दिला रहे हैं। वहीं पहाड़ में बचे देवी-देवताओं के मंदिरों को सुरक्षित रखने की अपील भी कर रहे हैं। इन होल्यारों का दर्द यह है कि पौड़ी जिले का नैनीडांडा क्षेत्र भी पलायन प्रभावित है। यहां के कई लोग कोटद्वार और रामनगर में बस गए हैं। गांवों में अब होली गाने और आयोजन करने वाले लोग ही नहीं बचे। कुछ साल पहले तक होली और रामलीला जैसे आयोजनों से धन एकत्र होता था, जिससे गांव के कई सामुदायिक कार्य पूरे किए जाते थे। लेकिन अब गांवों के कई घरों में ताले लटके हैं। हालांकि, पहाड़ से तराई में पहुंची ये होली टीमें युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं।

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